उत्तर - अकारांत कहते है।
Monday, 9 July 2018
Important Questions
उत्तर - अकारांत कहते है।
Wednesday, 20 June 2018
HINDI SPECIAL
✒ *HINDI SPECIAL*
प्रश्न 1- किस युग को आधुनिक हिन्दी कविता का सिंहद्वार कहा जाता है।
उत्तर - भारतेन्दु युग को ।
प्रश्न 2- द्विवेदी युग के प्रवर्तक कौन थे।
उत्तर - महावीर प्रसाद द्विवेदी ।
प्रश्न 3- हिन्दी का पहला सामाजिक उपन्यास कौन सा माना जाता है।
उत्तर - भाग्यवती ।
प्रश्न 4- सन् 1950 से पहले हिन्दी् कविता किस कविता के रूप में जानी जाती थी।
उत्तर - प्रयोगवादी ।
प्रश्न 5- ब्रज भाषा का सर्वोत्तम कवि है।
उत्तर - सूरदास ।
प्रश्न 6- आदिकाल के बाद हिन्दी में किस साहित्य का उदय हुआ ।
उत्तर - भक्ति साहित्य का ।
प्रश्न 7- निर्गुण भक्ति काव्य के प्रमुख कवि है।
उत्तर - कबीरदास ।
प्रश्न 8- किस काल को स्वर्णकाल कहा जाता है।
उत्तर - भक्ति काल को ।
प्रश्न 9- हिन्दी का आदि कवि किसे माना जाता है।
उत्तर - स्व्यंभू ।
प्रश्न 10- आधुनिक काल का समय कब से माना जाता है।
उत्तर - 1900 से अब तक ।
प्रश्न 11- जयशंकर प्रसाद की सर्वश्रेष्ठ रचना कौन सी है।
उत्तर - कामायनी ।
प्रश्न 12- बिहारी ने क्या लिखे है।
उत्तर - दोहे ।
प्रश्न 13- कबीर किसके शिष्य थे।
उत्तर - रामानन्द ।
प्रश्न 14- पद्यावत महाकाव्य कौन सी भाषा में लिखा है।
उत्तर - अवधी ।
प्रश्न 15- चप्पू किसे कहा जाता है।
उत्तर - गद्य और पद्य मिश्रित रचनाओं को ।
प्रश्न 16- कलाधर उपनाम से कविता कौन से कवि लिखते थे।
उत्तर - जयशंकर प्रसाद ।
प्रश्न 17- रस निधि किस कवि का उपनाम है।
उत्तर - पृथ्वी सिंह ।
प्रश्न 18- प्रेमचन्द्र के अधुरे उपन्यांस का नाम है।
उत्तर - मंगलसूत्र ।
प्रश्न 19- हिन्दी का सर्वाधिक नाटककार कौन है।
उत्तर - जयशंकर प्रसाद ।
प्रश्न 20- तुलसीकृत रामचरित मानस में कौन सी भाषा का प्रयोग किया गया है।
उत्तर - अवधी भाषा का प्रयोग किया गया है।
प्रश्न 21- एकांकी के जन्मदाता कौन है।
उत्तर - धर्मवीर भारती ।
प्रश्न 22- मीराबाई ने किस भाव से कृष्ण की उपासना की ।
उत्तर - माधुर्य भाव से ।
प्रश्न 23- रामचरित मानस का प्रधान रस है।
उत्तर - शान्त रस ।
प्रश्न 24- सबसे पहले अपनी आत्मकथा हिन्दी में किसने लिखी ।
उत्तर - डॉं. राजेन्द्र प्रसाद ने ।
प्रश्न 25- हिन्दी कविता का पहला महाकाव्य् कौन सा है।
उत्तर - पृथ्वीराज रासो ।
प्रश्न 26- हिन्दी के सर्वप्रथम प्रकाशित पत्र का नाम क्या है।
उत्तर - उदन्ड मार्तण्ड ।
प्रश्न 27- हिन्दी साहित्य की प्रथम कहानी है।
उत्तर - इन्दुमती ।
प्रश्न 28- आंचलिक रचनाऍं किससे सम्बन्धित होती है।
उत्तर - क्षेत्र विषेश से ।
प्रश्न 29- पृथ्वीराज रासो किस काल की रचना है ।
उत्तर - आदिकाल की ।
प्रश्न 30- हिन्दी गद्य का जन्म दाता किसको माना जाता है।
उत्तर - भारतेन्दु हरिचन्द्र जी को ।
प्रश्न 31- कवि कालिदास की ‘अभिज्ञान शाकुन्तलम्’ का हिन्दी अनुवाद किसने किया।
उत्तर - राजा लक्ष्मणसिंह ने ।
प्रश्न 32- पद्य साहित्य को कितने भागों में बॉंटा गया है।
उत्तर - पन्द्रह भागों में ।
प्रश्न 33- कवि नरेन्द्र शर्मा ने राष्ट्र पिता महात्मा गांधी के निधन से प्रभावित होकर कौन सी रचना की ।
उत्तर - रक्त चन्दन की रचना की ।
प्रश्न 34- नाट्यशास्त्रकारों द्वारा अमान्य रस कौन सा है।
उत्तर - वीभत्स रस ।
प्रश्न 35- काव्य शास्त्र का प्राचीनतम नाम क्या था।
उत्तर - अलंकार शास्त्र ।
प्रश्न 36- रीति सम्प्रदाय के संस्थापक कौन थे।
उत्तर - आचार्य वामन ।
प्रश्न 37- हिन्दी में काव्य शास्त्र के प्रथम आचार्य कौन है।
उत्तर - केशवदास ।
प्रश्न 38- साहित्य शब्द् किस शब्द से बना है।
उत्तर - सहित शब्द से बना है।
प्रश्न 39- हिन्दी साहित्य में जीवनी साहित्य का प्रारम्भ कौन से युग में हुआ ।
उत्तर - भारतेंदु युग में ।
प्रश्न 40- हिन्दी भाषा और सांहित्य के लेखक है।
उत्तर - श्यामसुंदरदास ।
प्रश्न 41- मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है । यह किसने कहा ।
उत्तर - अरस्तू ने ।
प्रश्न 42- भाषा किसे कहते है।
उत्तर - मनुष्य अपने मानसिक विचारों की अभिव्यक्ति के लिए जिस माध्यम का प्रयोग करता है। वह भाषा कहलाती है।
प्रश्न 43- भाषा शब्द की उत्पत्ति कहॉ से हुई है।
उत्तर - भाषा शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के भाष धातु से हुई है।
प्रश्न 44- सामान्य् शब्दों मे हम भाषा को किस तरह से व्यक्तु करेगे ।
उत्तर - भाषा वह साधन है । जिसके द्वारा मनुष्य अपने भावों या विचारों को बोलकर या लिखकर दूसरे मनुष्यो तक पहुँचाता है।
प्रश्न 45- भाषा को मोटे रूप में कितने भागों मे बांटा गया है।
उत्तर - भाषा को मोटे रूप में 2 भागों मे बांटा गया है।
1. लिखित भाषा
2. मौखिक भाषा
प्रश्न 46- हिन्दी भाषा का सम्बंन्ध किस लिपि से है।
उत्तर - देवनागरी लिपि से है।
प्रश्न 7- बोलने वालो की संख्या की दृष्टि से हिन्दी का विश्व मे कौन सा स्थान है।
उत्तर - तीसरा ।
प्रश्न 48- सूरदास के काव्य किस भाषा में है।
उत्तर - ब्रजभाषा में ।
प्रश्न 49- संविधान के किस अनुच्छे्द में कहा गया है – ‘’ संघ की राजभाषा हिन्दी् और लिपि देवनागरी होगी ‘’ ।
उत्तर - 343 वें अनुच्छेद में कहॉ गया ।
प्रश्न 50- हिन्दी शब्द की व्युात्पात्ति कहॉ से हुई है।
उत्तर - सिंधु से ।
प्रश्न 51- वर्तमान हिन्दी का प्रचलित रूप कैसा है।
उत्तर - खडी बोली ।
प्रश्न 52- जिन ध्वनियों के संयोग से शब्दों का निर्माण होता है। उन्हें क्या कहते है।
उत्तर - वर्ण ।
प्रश्न 53- स्वरों की संख्या कितनी मानी गई है।
उत्तर - 11 ।
प्रश्न 54- हिन्दी मानक वर्ण माला में कुल कितने वर्ण है।
उत्तर - 52 ।
प्रश्न 55- अन्तस्थ व्यंजनों की संख्या कितनी है।
उत्तर - 4 ।
प्रश्न 56- हिन्दी वर्ण माला को कितने भागों में विभक्त किया गया है।
उत्तर - दो भागो में ।
प्रश्न 57- हिन्दो वर्ण माला में स्पर्श व्यंजनों की संख्या कितनी है।
उत्तर - 25 ।
प्रश्न 58- मात्रा के आधार पर हिन्दी स्वंरों के दो भेद कौन से है।
उत्तर - हस्वर और दीर्घ ।
प्रश्न 59- ‘ क्ष ‘ वर्ण किसके योग से बना है।
उत्तर - ‘’ क् + ष ‘’ से बना है।
प्रश्न 60- हिन्दी वर्ण माला में व्यंजनों की संख्या है।
उत्तर - 33 व्यंजन है।
प्रश्न 61- सूरदास का काव्य किस भाषा में है।
उत्तर - ब्रजभाषा में ।
प्रश्न 62- हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग की स्थापना कब हुई ।
उत्तर - 1910 में ।
प्रश्न 63- संविधान की आठवीं अनुसूची में उल्लेखित भारतीय भाषाओं की संख्या है।
उत्तर - 22 ।
प्रश्न 64- हिन्दी की विशिष्ट बोली ब्रज भाषा किस रूप में सबसे अधिक प्रसिद्ध है।
उत्तर - काव्य भाषा ।
प्रश्न 65- देवनागरी लिपि किस लिपि का विकसित रूप है।
उत्तर - ब्राम्ही लिपि ।
प्रश्न 66- रामायण महाभारत आदि ग्रन्थ कौन सी भाषा में लिखे गये है।
उत्तर - आर्यभाषा में ।
प्रश्न 67- विद्यापति की प्रसिद्ध रचना पदावली किस भाषा में लिखी गई है।
उत्तर - मैथिली में ।
प्रश्न 68- भारत में हिन्दी का संवैधानिक स्वरूप है।
उत्तर - राजभाषा । ।
प्रश्न 69- जाटू किस बोली का उपनाम है।
उत्तर - बॉगरू ।
प्रश्न 70- ''एक मनई के दुई बेटवे रहिन'' यह अवतरण हिन्दी की किस बोली में है।
उत्तर - भोजपुरी से ।
प्रश्न 71- हिन्दी का पहला नाटक है।
उत्तर - नहुष ।
प्रश्न 72- कबीरदास की भाषा थी।
उत्तर - सधुक्कडी ।
प्रश्न 73- कलम का जादूगर किसे कहा जाता है।
उत्तर - रामवृक्ष बेनीपुरी को ।
प्रश्न 74- प्रगतिवाद उपयोगितावाद का दूसरा नाम है। यह कथन किसका है।
उत्तर - रामविलास शर्मा ।
प्रश्न 75- रामचरितमानस में कुल कितने काण्ड है।
उत्तर - सात ।
प्रश्न 76- हिन्दी साहित्य के इतिहास के रचयिता कौन है।
उत्तर -**
प्रश्न 77- गीत गोविन्द किस भाषा में है।
उत्तर - संस्कृत भाषा में ।
प्रश्न 78- लोक नायक किसको कहा जाता है।
उत्तर - तुलसीदास जी को ।
प्रश्न 79- इन्दिरापति किसे कहा जाता है।
उत्तर - विष्णु को ।
प्रश्न 80- पंचतंत्र क्या है।
उत्तर - कहानी संग्रह
Hindi very important short revision
*Hindi very important short revision*
।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।
संज्ञा के भेद - 5
रचना के आधार पर संज्ञा के भेद - 3
संधि के भेद - 3
स्वर संधि के भेद - 5
समास के भेद - 6
तत्पुरुष समास के भेद - 6
कारक के प्रकार - 8
वचन कितने प्रकार के है - 2
लिंग के प्रकार - 2
काल के भेद - 3
विशेषण के भेद - 4
सर्वनाम के भेद - 6
क्रिया विशेषण के भेद - 4
क्रिया के प्रकार - 2
छंद के प्रकार - 2
अलंकार के प्रकार - 3
रस कितने प्रकार के होते है - 9
शब्द शक्ति के प्रकार - 3
वाक्य के घटक होते है - 2
वर्णों की संख्या - 52
व्यंजन वर्णों की संख्या - 33
संचारीभाव की संख्या - 33
सात्विक भाव की संख्या - 8
विभाव के भेद - 2
काव्य के भेद - 2
वेद कितने है - 4
वेदांग कितने है - 6
पुराण कितने है - 18
बौद्धों के धर्म-ग्रन्थ - 3
संगीत-स्वर के भेद - 3
नायिका के भेद - 3
नायक के भेद - 4
श्रृंगार के भेद - 2
हास्य के भेद - 6
वीर-रस के भेद - 3
काव्य के गुण - 3
विद्याएँ -18
विवाह प्रकार - 8
माताएँ - 7
रत्न के प्रकार - 9
राशियाँ - 12
दिन-रात के पहर - 8
वायु के प्रकार - 5
अग्नियाँ - 3
गुण के प्रकार - 3
शारीरिक दोष - 3
लोक - 3
ऋण के प्रकार - 3
ताप - 3
युग - 4
पुरुषार्थ - 4
वर्ण - 4
दंड के प्रकार - 4
शत्रु - 6
संहिताएँ - 4
भारतीय व्यक्ति-जीवन के संस्कार - 16
ईश्वर के रूप - 2(सगुण, निर्गुण)
भाषा के प्रकार - 2
मूल स्वर के भेद - 3
व्यंजनों के प्रकार - 3
स्पर्श व्यंजन होते है - 25
उष्म व्यंजन होते है - 4
संयुक्त व्यंजन - 4
वर्णों की मात्राएँ होती है - 10
कंठ्य वर्णों की संख्या - 9
तालव्य वर्णों की संख्या - 9
प्रयोग की दृष्टि से शब्द-भेद - 2
विकारी शब्द के प्रकार - 4
अविकारी शब्द के प्रकार - 4
उत्पति की दृष्टि से शब्द-भेद - 4
व्युत्पत्ति या रचना की दृष्टि से शब्द भेद - 3
वाक्य के भेद- अर्थ के आधार पर - 8
वाक्य के भेद- रचना के आधार पर - 3
विधेय के भाग - 6
सर्वनाम की संख्या - 11
प्रत्यय के भेद - 2
रस के अंग - 4
अनुभाव के भेद - 4
स्थायी भाव के प्रकार - 9
श्रृंगार रस के प्रकार - 2
नाटक में रस - 8
Sunday, 17 June 2018
हिन्दी व्याकरण संधि
हिन्दी व्याकरण
संधि
संधि-संधि शब्द का अर्थ है मेल। दो निकटवर्ती वर्णों के परस्पर मेल से जो विकार (परिवर्तन) होता है वह संधि कहलाता है। जैसे-सम्+तोष=संतोष। देव+इंद्र=देवेंद्र। भानु+उदय=भानूदय।
संधि के भेद-संधि तीन प्रकार की होती हैं-
1. स्वर संधि।
2. व्यंजन संधि।
3. विसर्ग संधि।
1. स्वर संधि
दो स्वरों के मेल से होने वाले विकार (परिवर्तन) को स्वर-संधि कहते हैं। जैसे-विद्या+आलय=विद्यालय।
स्वर-संधि पाँच प्रकार की होती हैं-
(क) दीर्घ संधि
ह्रस्व या दीर्घ अ, इ, उ के बाद यदि ह्रस्व या दीर्घ अ, इ, उ आ जाएँ तो दोनों मिलकर दीर्घ आ, ई, और ऊ हो जाते हैं। जैसे-
(क) अ+अ=आ धर्म+अर्थ=धर्मार्थ, अ+आ=आ-हिम+आलय=हिमालय।
आ+अ=आ आ विद्या+अर्थी=विद्यार्थी आ+आ=आ-विद्या+आलय=विद्यालय।
(ख) इ और ई की संधि-
इ+इ=ई- रवि+इंद्र=रवींद्र, मुनि+इंद्र=मुनींद्र।
इ+ई=ई- गिरि+ईश=गिरीश मुनि+ईश=मुनीश।
ई+इ=ई- मही+इंद्र=महींद्र नारी+इंदु=नारींदु
ई+ई=ई- नदी+ईश=नदीश मही+ईश=महीश
(ग) उ और ऊ की संधि-
उ+उ=ऊ- भानु+उदय=भानूदय विधु+उदय=विधूदय
उ+ऊ=ऊ- लघु+ऊर्मि=लघूर्मि सिधु+ऊर्मि=सिंधूर्मि
ऊ+उ=ऊ- वधू+उत्सव=वधूत्सव वधू+उल्लेख=वधूल्लेख
ऊ+ऊ=ऊ- भू+ऊर्ध्व=भूर्ध्व वधू+ऊर्जा=वधूर्जा
(ख) गुण संधि
इसमें अ, आ के आगे इ, ई हो तो ए, उ, ऊ हो तो ओ, तथा ऋ हो तो अर् हो जाता है। इसे गुण-संधि कहते हैं जैसे-
(क) अ+इ=ए- नर+इंद्र=नरेंद्र अ+ई=ए- नर+ईश=नरेश
आ+इ=ए- महा+इंद्र=महेंद्र आ+ई=ए महा+ईश=महेश
(ख) अ+ई=ओ ज्ञान+उपदेश=ज्ञानोपदेश आ+उ=ओ महा+उत्सव=महोत्सव
अ+ऊ=ओ जल+ऊर्मि=जलोर्मि आ+ऊ=ओ महा+ऊर्मि=महोर्मि
(ग) अ+ऋ=अर् देव+ऋषि=देवर्षि
(घ) आ+ऋ=अर् महा+ऋषि=महर्षि
(ग) वृद्धि संधि
अ आ का ए ऐ से मेल होने पर ऐ अ आ का ओ, औ से मेल होने पर औ हो जाता है। इसे वृद्धि संधि कहते हैं। जैसे-
(क) अ+ए=ऐ एक+एक=एकैक अ+ऐ=ऐ मत+ऐक्य=मतैक्य
आ+ए=ऐ सदा+एव=सदैव आ+ऐ=ऐ महा+ऐश्वर्य=महैश्वर्य
(ख) अ+ओ=औ वन+ओषधि=वनौषधि आ+ओ=औ महा+औषध=महौषधि
अ+औ=औ परम+औषध=परमौषध आ+औ=औ महा+औषध=महौषध
(घ) यण संधि
(क) इ, ई के आगे कोई विजातीय (असमान) स्वर होने पर इ ई को ‘य्’ हो जाता है। (ख) उ, ऊ के आगे किसी विजातीय स्वर के आने पर उ ऊ को ‘व्’ हो जाता है। (ग) ‘ऋ’ के आगे किसी विजातीय स्वर के आने पर ऋ को ‘र्’ हो जाता है। इन्हें यण-संधि कहते हैं।
इ+अ=य्+अ यदि+अपि=यद्यपि ई+आ=य्+आ इति+आदि=इत्यादि।
ई+अ=य्+अ नदी+अर्पण=नद्यर्पण ई+आ=य्+आ देवी+आगमन=देव्यागमन
(घ) उ+अ=व्+अ अनु+अय=अन्वय उ+आ=व्+आ सु+आगत=स्वागत
उ+ए=व्+ए अनु+एषण=अन्वेषण ऋ+अ=र्+आ पितृ+आज्ञा=पित्राज्ञा
(ड़) अयादि संधि- ए, ऐ और ओ औ से परे किसी भी स्वर के होने पर क्रमशः अय्, आय्, अव् और आव् हो जाता है। इसे अयादि संधि कहते हैं।
(क) ए+अ=अय्+अ ने+अन+नयन (ख) ऐ+अ=आय्+अ गै+अक=गायक
(ग) ओ+अ=अव्+अ पो+अन=पवन (घ) औ+अ=आव्+अ पौ+अक=पावक
औ+इ=आव्+इ नौ+इक=नाविक
2. व्यंजन संधि
व्यंजन का व्यंजन से अथवा किसी स्वर से मेल होने पर जो परिवर्तन होता है उसे व्यंजन संधि कहते हैं। जैसे-शरत्+चंद्र=शरच्चंद्र।
(क) किसी वर्ग के पहले वर्ण क्, च्, ट्, त्, प् का मेल किसी वर्ग के तीसरे अथवा चौथे वर्ण या य्, र्, ल्, व्, ह या किसी स्वर से हो जाए तो क् को ग् च् को ज्, ट् को ड् और प् को ब् हो जाता है। जैसे-
क्+ग=ग्ग दिक्+गज=दिग्गज। क्+ई=गी वाक्+ईश=वागीश
च्+अ=ज् अच्+अंत=अजंत ट्+आ=डा षट्+आनन=षडानन
प+ज+ब्ज अप्+ज=अब्ज
(ख) यदि किसी वर्ग के पहले वर्ण (क्, च्, ट्, त्, प्) का मेल न् या म् वर्ण से हो तो उसके स्थान पर उसी वर्ग का पाँचवाँ वर्ण हो जाता है। जैसे-
क्+म=ड़् वाक्+मय=वाड़्मय च्+न=ञ् अच्+नाश=अञ्नाश
ट्+म=ण् षट्+मास=षण्मास त्+न=न् उत्+नयन=उन्नयन
प्+म्=म् अप्+मय=अम्मय
(ग) त् का मेल ग, घ, द, ध, ब, भ, य, र, व या किसी स्वर से हो जाए तो द् हो जाता है। जैसे-
त्+भ=द्भ सत्+भावना=सद्भावना त्+ई=दी जगत्+ईश=जगदीश
त्+भ=द्भ भगवत्+भक्ति=भगवद्भक्ति त्+र=द्र तत्+रूप=तद्रूप
त्+ध=द्ध सत्+धर्म=सद्धर्म
(घ) त् से परे च् या छ् होने पर च, ज् या झ् होने पर ज्, ट् या ठ् होने पर ट्, ड् या ढ् होने पर ड् और ल होने पर ल् हो जाता है। जैसे-
त्+च=च्च उत्+चारण=उच्चारण त्+ज=ज्ज सत्+जन=सज्जन
त्+झ=ज्झ उत्+झटिका=उज्झटिका त्+ट=ट्ट तत्+टीका=तट्टीका
त्+ड=ड्ड उत्+डयन=उड्डयन त्+ल=ल्ल उत्+लास=उल्लास
(ड़) त् का मेल यदि श् से हो तो त् को च् और श् का छ् बन जाता है। जैसे-
त्+श्=च्छ उत्+श्वास=उच्छ्वास त्+श=च्छ उत्+शिष्ट=उच्छिष्ट
त्+श=च्छ सत्+शास्त्र=सच्छास्त्र
(च) त् का मेल यदि ह् से हो तो त् का द् और ह् का ध् हो जाता है। जैसे-
त्+ह=द्ध उत्+हार=उद्धार त्+ह=द्ध उत्+हरण=उद्धरण
त्+ह=द्ध तत्+हित=तद्धित
(छ) स्वर के बाद यदि छ् वर्ण आ जाए तो छ् से पहले च् वर्ण बढ़ा दिया जाता है। जैसे-
अ+छ=अच्छ स्व+छंद=स्वच्छंद आ+छ=आच्छ आ+छादन=आच्छादन
इ+छ=इच्छ संधि+छेद=संधिच्छेद उ+छ=उच्छ अनु+छेद=अनुच्छेद
(ज) यदि म् के बाद क् से म् तक कोई व्यंजन हो तो म् अनुस्वार में बदल जाता है। जैसे-
म्+च्=ं किम्+चित=किंचित म्+क=ं किम्+कर=किंकर
म्+क=ं सम्+कल्प=संकल्प म्+च=ं सम्+चय=संचय
म्+त=ं सम्+तोष=संतोष म्+ब=ं सम्+बंध=संबंध
म्+प=ं सम्+पूर्ण=संपूर्ण
(झ) म् के बाद म का द्वित्व हो जाता है। जैसे-
म्+म=म्म सम्+मति=सम्मति म्+म=म्म सम्+मान=सम्मान
(ञ) म् के बाद य्, र्, ल्, व्, श्, ष्, स्, ह् में से कोई व्यंजन होने पर म् का अनुस्वार हो जाता है। जैसे-
म्+य=ं सम्+योग=संयोग म्+र=ं सम्+रक्षण=संरक्षण
म्+व=ं सम्+विधान=संविधान म्+व=ं सम्+वाद=संवाद
म्+श=ं सम्+शय=संशय म्+ल=ं सम्+लग्न=संलग्न
म्+स=ं सम्+सार=संसार
(ट) ऋ,र्, ष् से परे न् का ण् हो जाता है। परन्तु चवर्ग, टवर्ग, तवर्ग, श और स का व्यवधान हो जाने पर न् का ण् नहीं होता। जैसे-
र्+न=ण परि+नाम=परिणाम र्+म=ण प्र+मान=प्रमाण
(ठ) स् से पहले अ, आ से भिन्न कोई स्वर आ जाए तो स् को ष हो जाता है। जैसे-
भ्+स्=ष अभि+सेक=अभिषेक नि+सिद्ध=निषिद्ध वि+सम+विषम
3. विसर्ग-संधि
विसर्ग (:) के बाद स्वर या व्यंजन आने पर विसर्ग में जो विकार होता है उसे विसर्ग-संधि कहते हैं। जैसे-मनः+अनुकूल=मनोनुकूल।
(क) विसर्ग के पहले यदि ‘अ’ और बाद में भी ‘अ’ अथवा वर्गों के तीसरे, चौथे पाँचवें वर्ण, अथवा य, र, ल, व हो तो विसर्ग का ओ हो जाता है। जैसे-
मनः+अनुकूल=मनोनुकूल अधः+गति=अधोगति मनः+बल=मनोबल
(ख) विसर्ग से पहले अ, आ को छोड़कर कोई स्वर हो और बाद में कोई स्वर हो, वर्ग के तीसरे, चौथे, पाँचवें वर्ण अथवा य्, र, ल, व, ह में से कोई हो तो विसर्ग का र या र् हो जाता है। जैसे-
निः+आहार=निराहार निः+आशा=निराशा निः+धन=निर्धन
(ग) विसर्ग से पहले कोई स्वर हो और बाद में च, छ या श हो तो विसर्ग का श हो जाता है। जैसे-
निः+चल=निश्चल निः+छल=निश्छल दुः+शासन=दुश्शासन
(घ)विसर्ग के बाद यदि त या स हो तो विसर्ग स् बन जाता है। जैसे-
नमः+ते=नमस्ते निः+संतान=निस्संतान दुः+साहस=दुस्साहस
(ड़) विसर्ग से पहले इ, उ और बाद में क, ख, ट, ठ, प, फ में से कोई वर्ण हो तो विसर्ग का ष हो जाता है। जैसे-
निः+कलंक=निष्कलंक चतुः+पाद=चतुष्पाद निः+फल=निष्फल
(ड)विसर्ग से पहले अ, आ हो और बाद में कोई भिन्न स्वर हो तो विसर्ग का लोप हो जाता है। जैसे-
निः+रोग=निरोग निः+रस=नीरस
(छ) विसर्ग के बाद क, ख अथवा प, फ होने पर विसर्ग में कोई परिवर्तन नहीं होता। जैसे-
अंतः+करण=अंतःकरण
रस, छन्द और अलंकार विस्तार सहित
रस, छन्द और अलंकार विस्तार सहित
रस, छन्द और अलंकार तीनो ही हिन्दी काव्य के महत्व पूर्ण अंग है तथा तीनो की अपनी अलग-अलग विशेषता है जिसका वर्णन नीचे किया जा रहा है ।
रस का अर्थ तथा प्रकार -
रस का शाब्दिक अर्थ है 'आनन्द'। हिन्दी भाषा के किसी काव्य को पढ़ने या सुनने से जिस आनन्द की प्राप्ति होती है, उसे रस कहा जाता है। रस को हिन्दी काव्य की आत्मा या प्राण भी माना जाता है।
रस के चार अवयव होते है।
स्थायी भाव - स्थायी भाव का अर्थ होता है प्रधान भाव और प्रधान भाव वही हो सकता है जो रस की अवस्था तक पहुँचता है।
विभाव - इसके दो भाग होते है १ आलंबन विभाव - जिसका आलंबन या सहारा पाकर स्थायी भाव जगते हैं । जैसे- नायक-नायिका आदि। २ उद्दीपन विभाव - जिन वस्तुओं या परिस्थितियों को देखकर स्थायी भाव उद्दीप्त होने लगता है। जैसे- चाँदनी, एकांत स्थल आदि
अनुभाव - मनोगत भाव को व्यक्त करने वाले शरीर-विकार अनुभाव कहलाते हैं। ये आठ तरह के होते है । स्तंभ, स्वेद, रोमांच, स्वर-भंग, कम्प, विवर्णता (रंगहीनता), अश्रु, प्रलय (संज्ञाहीनता या निश्चेष्टता) आदि।
संचारी भाव - मन में आने-जाने वाले वाले भावों को संचारी या व्यभिचारी भाव कहते हैं।
रस के प्रकार तथा भाव
श्रृंगार रस - रति/प्रेम
हास्य रस - हास
करुण रस- शोक
वीर रस - उत्साह
रौद्र रस- क्रोध
भयानक रस - भय
वीभत्स रस - घृणा
अद्भुत रस - आश्चर्य
शांत रस - वैराग्य
वात्सल्य रस - वात्सल्य
भक्ति रस - रति\अनुराग
छन्द का अर्थ तथा अंग -
छंद शब्द 'चद्' धातु से बना है जिसका अर्थ है 'खुश करना'। वर्णों या मात्राओं के नियमित संख्या के विन्यास से यदि आह्लाद (ख़ुशी) पैदा हो, तो उसे छंद कहते हैं'।
छन्द के अंग -
चरण/ पद/ पाद - छंद के प्रायः 4 भाग होते हैं। इनमें से प्रत्येक को 'चरण' कहते हैं।
वर्ण - एक स्वर वाली ध्वनि को वर्ण तथा जिस ध्वनि में स्वर नहीं हो उसे वर्ण नहीं माना जाता।
मात्रा - किसी वर्ण या ध्वनि के उच्चारण-काल को मात्रा कहते हैं जैसे - अ, इ, उ, आ, ई, ऊ, ए, ऐ, ओ, आदि ।
संख्या - वर्णों और मात्राओं की गणना को संख्या कहते हैं।
क्रम - लघु-गुरु के स्थान निर्धारण को क्रम कहते हैं।
गण - गण का अर्थ है 'समूह अतः लघु-गुरु के नियत क्रम से 3 वर्णों के समूह को गण कहा जाता है'।
गति - छंद के पढ़ने के प्रवाह या लय को गति कहते हैं।
यति/ विराम - छंद में नियमित वर्ण या मात्रा पर साँस लेने के लिए रूकना पड़ता है, इसी रूकने के स्थान को यति या विरोम कहते हैं।
तुक - छंद के चरणान्त की अक्षर-मैत्री (समान स्वर-व्यंजन की स्थापना) को तुक कहते हैं।
अलंकार का अर्थ तथा अंग -
काव्य में भाषा को शब्दार्थ से सुसज्जित तथा सुन्दर बनाने वाले चमत्कार को अलंकार कहते हैं। अलंकार का शाब्दिक अर्थ है, 'आभूषण'। जिस प्रकारमनुष्य सुवर्ण, वस्त्रा और आभूषणों आदि से शरीर की शोभा बढ़ती है उसी प्रकार काव्य अलंकारों से काव्य की शोभा बदती है।
अलंकार को दो भागों में विभाजित किया गया है:-
शब्दालंकार (शब्द पर आश्रित अलंकार) - जहाँ शब्दों के प्रयोग से सौंदर्य में वृद्धि होती है और काव्य में चमत्कार आ जाता है, वहाँ शब्दालंकार माना जाता है।
अर्थालंकार (अर्थ पर आश्रित अलंकार) - जहाँ शब्दों के अर्थ से चमत्कार स्पष्ट हो, वहाँ अर्थालंकार माना जाता है।
अलंकार के प्रकार
उपमा अलंकार - जिस जगह दो वस्तुओं में अन्तर रहते हुए भी आकृति एवं गुण की समानता दिखाई जाए उसे उपमा अलंकार कहा जाता है।
रूपक अलंकार - जिस जगह उपमेय पर उपमान का आरोप किया जाए, उस अलंकार को रूपक अलंकार कहा जाता है,
उत्प्रेक्षा अलंकार - जिस जगह उपमेय को ही उपमान मान लिया जाता है यानी अप्रस्तुत को प्रस्तुत मानकर वर्णन किया जाता है। वहाँ उत्प्रेक्षा अलंकार होता है।
उपमेयोपमा अलंकार - उपमेय और उपमान को परस्पर उपमान और उपमेय बनाने की प्रक्रिया को उपमेयोपमा अलंकार कहते हैं।
अतिशयोक्ति अलंकार - जिस स्थान पर लोक-सीमा का अतिक्रमण करके किसी विषय का वर्णन होता है। वहाँ पर अतिशयोक्ति अलंकार होता है।
उल्लेख अलंकार - जहाँ एक वस्तु का वर्णन अनेक प्रकार से किया जाए, वहाँ उल्लेख अलंकार होता है।
विरोधाभास अलंकार - जहाँ विरोध ना होते हुए भी विरोध का आभास दिया जाता है, वहाँ विरोधाभास अलंकार होता है।
दृष्टान्त अलंकार - जिस स्थान पर दो सामान्य या दोनों विशेष वाक्य में बिम्ब- प्रतिबिम्ब भाव होता है, उस स्थान पर दृष्टान्त अलंकार होता है।
अंत मे...हिन्दी व्याकरण व भाषा शैली इतनी भी सरल नही है..जितनी हम लापरवाह बनके इसकी उपेक्षा करते है...व्याकरण सीखने के लिए धीरता व गंभीरता बहुत आवश्यक है..
धन्यवाद
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